विशेष खोजी रिपोर्ट | नई दिल्ली | 15 सितंबर 2026
देशभर में मोबाइल स्क्रीन पर बजने वाली हर अज्ञात घंटी अब केवल सामान्य कॉल नहीं, बल्कि वित्तीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी थी। आम नागरिकों से लेकर वरिष्ठ नौकरशाहों तक को 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर जीवनभर की जमापूंजी हड़पने वाले साइबर सिंडिकेट्स पर अब सरकार ने निर्णायक प्रहार किया है।
केंद्रीय दूरसंचार विभाग (DoT), भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) और गृह मंत्रालय की संयुक्त साइबर विंग ने एक समन्वित राष्ट्रीय अभियान के तहत लाखों संदिग्ध सिम कार्ड्स और अनाधिकृत कॉल सेंटरों के ट्रांसमिशन गेटवे तुरंत प्रभाव से फ्रीज कर दिए हैं।
धोखे का आधुनिक ताना-बाना: कैसे काम कर रहा था पूरा सिंडिकेट?
खोजी जांच में यह बात सामने आई है कि यह संगठित धोखाधड़ी केवल यादृच्छिक (random) कॉल्स का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसमें अत्याधुनिक विदेशी सॉफ्टवेयर और स्थानीय एजेंटों का गठजोड़ सक्रिय था:
वर्चुअल कॉलिंग और कॉलर आईडी स्पूफिंग: जालसाज विदेशी वीओआईपी (VOIP) सर्वर्स का उपयोग करके स्क्रीन पर भारतीय जांच एजेंसियों (CBI, ED या राज्य पुलिस) के आधिकारिक टेलीफोन नंबर दिखाते थे।
नकली सिम फार्म्स: सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में फर्जी आधार क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके एक-एक पहचान पर दर्जनों सिम कार्ड जारी करवाए गए, जिनका उपयोग अवैध सिम-बॉक्स डिवाइसेज में ऑटोमेटेड डायलिंग के लिए किया जाता था।
मनोवैज्ञानिक दबाव (Digital Arrest): कॉल प्राप्तकर्ता को बताया जाता था कि उसके आधार कार्ड का उपयोग किसी मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध पार्सल में हुआ है। इसके बाद वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस थाने का सेटअप दिखाकर घंटों तक कमरे में बंद रहने और पैसे ट्रांसफर करने के लिए विवश किया जाता था।
सख्त विनियामक कदम: नेटवर्क स्तर पर फिल्टर होंगे फर्जी कॉल्स
TRAI और दूरसंचार मंत्रालय ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए नई संचालन प्रक्रिया (SOP) अनिवार्य कर दी है, जिसके तहत वित्तीय सुरक्षा को तीन स्तरों पर मजबूत किया गया है:
कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) का अनिवार्य रोलआउट: अब किसी भी कॉलर का टेलीकॉम-वेरिफाइड असली नाम सीधे रिसीवर की स्क्रीन पर चमकेगा, जिसे कोई भी थर्ड-पार्टी ऐप या कॉलर बदल नहीं सकेगा।
140 और 160 सीरीज का कड़ा वर्गीकरण: सेवा प्रदाताओं को निर्देश दिया गया है कि बैंकिंग और संवेदनशील सरकारी लेन-देन से संबंधित आधिकारिक कॉल्स केवल 160-सीरीज से होंगी, जबकि प्रमोशनल कॉल्स 140-सीरीज पर सीमित रहेंगी। इसके अतिरिक्त सामान्य 10 अंकों वाले मोबाइल नंबर से कमर्शियल या बल्क कॉलिंग करने पर नंबर हमेशा के लिए अमान्य घोषित होगा।
सिम स्वैप और बायोमेट्रिक री-वेरिफिकेशन: यदि किसी सिम को अपग्रेड या दोबारा जारी कराया जाता है, तो अगले 24 घंटों के लिए उस नंबर पर सभी आउटगोइंग और इनकमिंग बैंकिंग ओटीपी (OTP) सेवाएं स्वचालित रूप से निलंबित रहेंगी।
गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस समन्वित कार्रवाई के पहले पखवाड़े में ही देश के 18 प्रमुख साइबर हॉटस्पॉट्स से संचालित होने वाले 500 से अधिक अनधिकृत सिम-बॉक्सेस जब्त किए गए हैं।
उद्योग जगत का रुख: तकनीक और प्राइवेसी में संतुलन जरूरी
सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) के प्रतिनिधियों ने विनियामक कदमों का स्वागत किया है, लेकिन नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाओं की ओर भी ध्यान दिलाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, नेटवर्क लेयर पर रियल-टाइम एआई पैकेट इंस्पेक्शन लागू करने से ग्रामीण इलाकों में वॉयस कॉल कनेक्ट होने में एक से दो सेकंड का मामूली विलंब हो सकता है।
हालांकि, उपभोक्ताओं की वित्तीय सुरक्षा के सामने इस तकनीकी विलंब को नियामकों ने पूरी तरह स्वीकार्य माना है।
नागरिकों के लिए सतर्कता निर्देश: फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करें?
नियामकों ने स्पष्ट किया है कि भारत की कोई भी कानूनी या पुलिस एजेंसी कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर किसी नागरिक को 'अरेस्ट' नहीं करती और न ही खाते की जांच के नाम पर किसी 'सरकारी सुरक्षित खाते' में पैसे ट्रांसफर करने को कहती है।
यदि किसी उपभोक्ता को ऐसा कोई संदिग्ध कॉल प्राप्त होता है:
तत्काल फोन काटें और नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर सूचित करें।
केंद्र सरकार के Chakshu (चक्षु) पोर्टल पर जाकर संदिग्ध नंबर और कॉल का स्क्रीनशॉट दर्ज करें ताकि उस नंबर को राष्ट्रीय स्तर पर ब्लैकलिस्ट किया जा सके।
कभी भी अज्ञात कॉलर के कहने पर मोबाइल स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स (AnyDesk, TeamViewer) इंस्टॉल न करें।
दूरसंचार तंत्र का यह नया सुरक्षा कवच डिजिटल स्पेस को नागरिकों के लिए सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा नीतिगत कदम साबित होने जा रहा है।