नई दिल्ली (Deap Analyzer News Network):
राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में शनिवार, 12 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ हुआ। भारत की मेजबानी में आयोजित इस महासम्मेलन के पहले दिन कूटनीतिक, आर्थिक और वैश्विक सुरक्षा के मोर्चे पर ठोस प्रगति देखने को मिली। सम्मेलन में भाग ले रहे सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने गहन मंथन के बाद सर्वसम्मति से 140 बिंदुओं वाली 'नई दिल्ली घोषणा' (New Delhi Declaration) को औपचारिक मंजूरी दे दी। लगभग 45 पन्नों के इस विस्तृत साझा दस्तावेज में वैश्विक अर्थव्यवस्था, आतंकवाद और बहुध्रुवीय शासन व्यवस्था को लेकर ब्रिक्स का साझा रुख रेखांकित किया गया है।
आतंकवाद पर कड़ा संदेश और पहलगाम का उल्लेख 'नई दिल्ली घोषणा' में सीमा पार आतंकवाद और आतंकी नेटवर्क्स के वित्तीय पोषण के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया। घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा की गई और आतंकवाद के सभी स्वरूपों के खात्मे के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता दोहराई गई। इसके साथ ही एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों को वैश्विक व्यापार के नियमों के विपरीत बताते हुए सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने पर सहमति जताई गई।
मोदी-शी वार्ता: 7 साल बाद भारतीय धरती पर चीनी राष्ट्रपति सम्मेलन के इतर सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक रही। करीब सात साल के अंतराल के बाद भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति के साथ वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के आपसी मतभेद विवाद में तब्दील नहीं होने चाहिए। बातचीत में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थायी शांति, सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन को पाटने पर प्रमुखता से चर्चा हुई।
रणनीतिक तालमेल: पुतिन और पेजेश्कियान से अहम बैठकें प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ करने पर विमर्श हुआ। दोनों नेता एक ही वाहन में सवार होकर भारत मंडपम पहुंचे, जहां पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल संत तिरुवल्लुवर द्वारा रचित 'तिरुक्कुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया। वार्ता में दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर के पार ले जाने का साझा लक्ष्य निर्धारित किया, साथ ही रूस-यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान पर भी चर्चा हुई।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ द्विपक्षीय संवाद किया, जिसमें पश्चिम एशिया के वर्तमान तनाव, रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं को गति देने पर सहमति बनी।