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"मेड इन चाइना" को "मेड इन गलगोटिया" बताने का महाकांड! AI समिट में रोबो-डॉग ने यूनिवर्सिटी को बाहर का रास्ता दिखाया

लेखक: ADITYA SRIVASTAV दिनांक: फ़रवरी 22, 2026

 नई दिल्ली, 23 फरवरी 2026

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में जो हुआ, वो देखकर पूरा देश हँस-हँस कर लोट-पोट हो गया और साथ ही शर्म भी आ रही है। ग्रेटर नोएडा की मशहूर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने स्टॉल पर एक क्यूट-सा रोबोटिक डॉग "Orion" दिखाया और बड़े गर्व से कहा – "ये हमारा इन-हाउस इनोवेशन है, हमारे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में डेवलप किया गया!"

लेकिन सच सामने आते ही माजरा उल्टा पड़ गया। वो रोबोटिक डॉग असल में चीन की कंपनी Unitree का मशहूर मॉडल Go2 था, जो भारत में 2-3 लाख रुपये में आसानी से ऑनलाइन मिल जाता है। यानी "मेड इन चाइना" को चुपके से "मेड इन गलगोटिया" का ठप्पा लगा दिया गया!

प्रोफेसर नेहा सिंह ने DD न्यूज़ को इंटरव्यू में बड़े जोश में कहा था कि ये हमारा प्रोजेक्ट है। वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई – "रोबो डॉग ने भी शर्म से मुँह छिपा लिया", "गलगोटिया अब AI नहीं, CI (Chinese Innovation) सिखा रही है"।

समिट ऑर्गनाइजर्स और MeitY ने तुरंत एक्शन लिया। यूनिवर्सिटी के स्टॉल की बिजली काट दी गई और उन्हें तुरंत वहाँ से बाहर निकाल दिया गया। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने बाद में माफी माँगी – "गलतफहमी हो गई, प्रोफेसर को पूरी जानकारी नहीं थी, वो ओवर-एक्साइटेड हो गईं"। नेहा सिंह को सस्पेंड भी कर दिया गया।

लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। समाजवादी पार्टी के छात्रों ने यूनिवर्सिटी गेट पर प्रोटेस्ट किया और मान्यता रद्द करने की माँग की। लोग बोल रहे हैं – "ये पहला कांड नहीं है, पहले भी परिवार के कई मामले सामने आए थे"।

अब सवाल ये है – क्या सिर्फ एक प्रोफेसर की गलती थी, या यूनिवर्सिटी ने जानबूझकर "इंडियन इनोवेशन" का ड्रामा किया? AI समिट जैसे बड़े मंच पर देश की इमेज खराब करने का ये सस्ता तरीका था या बस "जल्दबाजी में गलती"?

देश को असली इनोवेशन चाहिए, न कि चाइनीज प्रोडक्ट पर "Orion" नाम चिपका कर "विकसित भारत" का ढोंग रचाना। गलगोटिया वाले अब क्या कहेंगे – "अगली बार हम असली वाला लाएँगे" या फिर "सॉरी, रोबो डॉग अब रिटायर हो गया"?