डॉलर पर BRICS के प्रभाव: एक वैश्विक बदलाव की शुरुआत?

 नई दिल्ली, 4 फरवरी 2026 – दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक अमेरिकी dollar अब पहले जैसा अजेय नहीं रह गया है। BRICS देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और नए सदस्यों सहित) की बढ़ती कोशिशें धीरे-धीरे लेकिन लगातार अमेरिकी डॉलर की वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह de-dollarization की प्रक्रिया अब सिर्फ बातों में नहीं, बल्कि व्यावहारिक कदमों में बदल रही है।



हाल के वर्षों में BRICS ने आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़ाया है। रूस ने दावा किया है कि उसके BRICS भागीदारों के साथ लगभग 90% व्यापार अब रूबल, युआन, रुपये आदि में हो रहा है। BRICS देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी को 58.2% से घटाकर जनवरी 2026 तक 56.92% कर दिया है। साथ ही, इन देशों की केंद्रीय बैंकों ने 2025 में 1100 टन से ज्यादा सोना खरीदा, जो पिछले सात दशकों का सबसे बड़ा सालाना संग्रह है। यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि डॉलर पर निर्भरता कम करने की मुहिम तेज हो गई है।

सबसे महत्वपूर्ण विकास BRICS के डिजिटल भुगतान सिस्टम में हो रहा है। mBridge और BRICS Bridge जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जो SWIFT सिस्टम के विकल्प के रूप में काम कर सकते हैं। SWIFT अमेरिका और यूरोप के प्रभाव में है, और प्रतिबंधों के समय इसका इस्तेमाल हथियार की तरह होता है। भारत की रिजर्व बैंक ने हाल ही में प्रस्ताव दिया है कि 2026 में भारत की मेजबानी वाले BRICS सम्मेलन में सदस्य देशों की central bank digital currencies (CBDCs) को आपस में जोड़ा जाए। इससे व्यापार और पर्यटन में डॉलर की जरूरत कम हो सकती है।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जनवरी 2026 में BRICS ने "the Unit" नामक एक नई डिजिटल settlement currency लॉन्च की है, जो आंशिक रूप से सोने से backed है और सदस्य देशों के बीच व्यापार को आसान बनाती है। हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि एक पूर्ण BRICS common currency अभी दूर की कौड़ी है। ब्राजील और भारत जैसे देश स्पष्ट कह चुके हैं कि वे डॉलर को पूरी तरह बदलने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि विकल्प बना रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने BRICS को चेतावनी दी है कि अगर वे डॉलर के विकल्प की कोशिश करेंगे तो 100% तक टैरिफ लगा दिए जाएंगे। इस धमकी के बावजूद BRICS आगे बढ़ रहा है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर अभी भी वैश्विक लेन-देन में 88-90% हिस्सेदारी रखता है, और उसकी network strength बहुत मजबूत है। लेकिन लंबे समय में अगर BRICS का वैकल्पिक सिस्टम सफल होता है, तो डॉलर की मांग घट सकती है, अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है।

कुल मिलाकर, BRICS का प्रभाव डॉलर पर तत्काल संकट नहीं ला रहा, लेकिन यह एक धीमी लेकिन स्थिर चुनौती जरूर है। 2026 का BRICS सम्मेलन इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है। दुनिया अब multipolar आर्थिक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां एक मुद्रा का एकछत्र राज कमजोर पड़ रहा है।

(यह लेख विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्रोतों और हालिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।)

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