पुणे, 3 फरवरी 2026 – सुप्रीम कोर्ट ने 2024 की पुणे पोर्शे दुर्घटना से जुड़े ब्लड सैंपल बदलने के मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने यह फैसला सुनाया, जिसमें आरोपियों की 18 महीने की लंबी हिरासत को आधार बनाया गया।
आरोपी आशीष सतीश मित्तल, आदित्य अविनाश सूद और अमर संतोष गायकवाड़ पर आरोप है कि उन्होंने कार में सवार दो नाबालिग यात्रियों (ड्राइवर को छोड़कर) के ब्लड सैंपल अपने सैंपल से बदल दिए थे। इन नाबालिगों पर शराब के प्रभाव में होने का शक था, और इस बदलाव से सबूत छिपाने की कोशिश की गई। मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी चार्ज लगाए गए हैं, जिसमें जालसाजी, सबूतों से छेड़छाड़ और रिश्वतखोरी शामिल है।
यह मामला मई 2024 की उस दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें एक 17 वर्षीय नाबालिग ने कथित तौर पर शराब के नशे में पोर्शे कार चलाते हुए दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को कुचल दिया था। दुर्घटना पुणे के कल्याणी नगर इलाके में हुई, जिसमें अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई। जांच में पता चला कि ब्लड सैंपल बदलने के लिए ससून अस्पताल के स्टाफ को 3 लाख रुपये की रिश्वत दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की जमानत मंजूर करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा शर्तें लगाई जाएंगी। इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में इनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें सबूतों से छेड़छाड़ और धन-बल के दुरुपयोग का खतरा बताया गया था. कोर्ट ने फैसले में अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी टिप्पणी की, कि बच्चों को बिना निगरानी के वाहन और पैसे सौंपना गलत है।
आरोपियों में आदित्य सूद एक नाबालिग यात्री के पिता हैं, आशीष मित्तल दूसरे नाबालिग के पिता के मित्र, और अमर गायकवाड़ मध्यस्थ की भूमिका में थे। मुकदमा अभी जारी है, और अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट पर निर्भर करेगा। इस फैसले से समाज में मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, क्योंकि मामला सबूत छिपाने और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।